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"Lifafa" सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि पत्रकारिता और लोकतंत्र के रिश्ते पर लिखा गया एक साहसिक बयान है। Ravish Kumar की यह किताब उस दौर की सच्चाई को सामने लाती है जब मीडिया 'गोदी मीडिया' बन चुका था और सवाल पूछने वाले चुप कराए जा रहे थे। यह किताब आपको सोचने पर मजबूर करेगी — कि क्या हम अब भी लोकतंत्र में हैं या एक टीवी स्क्रीन वाले भ्रम में?