85% OFF
"Raat-Pashmine-Ki" गुलज़ार की ख़ास काव्य-कृति है, जो रात्रि की खामोशियों, यादों के धागों और प्रेम की मुलायमियत को शब्दों में पिरोती है। इस किताब में शायरी और नज़्में ऐसे बहती हैं जैसे चाँदनी रात में कोई रेशमी ख्याल। पढ़ने वालों को ये एहसास होता है मानो जज़्बातों को किसी ने पश्मीने में लपेटकर पेश किया हो।