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"Naraz" एक ऐसा एहसास है जिसे हर कोई कभी न कभी महसूस करता है — अपनों से, खुद से या ज़िंदगी से। यह किताब उन्हीं नाज़ुक लम्हों को शब्दों में ढालती है, जहां शिकायतें हैं, सन्नाटा है, मगर दिल में कहीं न कहीं मोहब्बत अब भी ज़िंदा है। हर पन्ना आपको खुद से जोड़ता है, और शायद किसी भूले रिश्ते की दस्तक भी देता है।